एग्जाम स्ट्रेस : थोड़ा थोड़ा जरुरी होता है , थोड़ा भगाना  पड़ता है 

तीन तरह के होते हैं : प्री एग्जाम स्ट्रेस, इन एग्जाम स्ट्रेस , पोस्ट एग्जाम स्ट्रेस

 

We live in a test-conscious, test-giving culture in which the lives of people are in part determined by their test performance. sarason 

 

हम एक टेस्ट कॉन्शियस वातावरण एवं कल्चर में रहते हाँ , जहाँ लोगों की जिंदगी उनके टेस्ट परफॉरमेंस के आधार पर निर्धारित की जाती है 

 

अमेरिका के प्रसिद्ध मनोविज्ञानिक सरासन ने १९६० में यह बात कही और आज २०१६ में भी ये बात उतनी ही प्रासंगिक है और आगे भी रहेगी 

 

परीक्षा ने हमारे जीने , मूल्याङ्कन के तरीके को बदल दिया है 

 

 

परीक्षा तनाव - एग्जाम स्ट्रेस आज हर विद्यार्थी एवं अभिवावक के लिए चुनौती बन कर उभरा है 

 

सबसे पहले तनाव की मूल मनोवैज्ञानिक  अवधारणा को जानना आवश्यक है  आवश्यक है की ऐसे ठीक तरीके से समझ जाय 

 

तनाव क्या है :  तनाव एक रिएक्शन है उस स्टिमुलस का जो हमारा शारीरिक या मानसिक equilibrium को डिस्टर्ब करता हैं 

 

Stress is simply a reaction to a stimulus that disturbs our physical or mental equilibrium

eustress ;

 


स्ट्रेस दो प्रकार के होते हैं : eustress एवं डिस्ट्रेस

 हैंस सेली ने इस शब्द का प्रयोग करते हुए कहा था eustress गुड स्ट्रेस है और डिस्ट्रेस नेगेटिव /bad स्ट्रेस है 

eustress

 

मोटीवेट करता है , ऊर्जा का संचार करता है 

ये शार्ट टर्म होता है 

यह तनाव व्यक्ति को लगता है की वो इससे निपट सकता है 

उत्साहवर्धक होता हही 

पर्फॉर्मन्स बढ़ता है 

 

 

डिस्ट्रेस 

 

एंग्जायटी का कारण बनता है 

ये शार्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म दोनों हो सकता है 

व्यक्ति को लगता है इससे पार पाना मुश्किल है 

परफॉरमेंस घटाता है 

शारीरिक एवं मानसिक समस्या का कारन हो सकता है 

 

सफलता के लिए eustress जरुरी है और डिस्ट्रेस का नियंत्रण आवश्यक है 

 

 

एग्जाम स्ट्रेस क्या है : परीक्षा के कारण उत्पन्न उत्तेजना जिससे परीक्षा के पहले या परीक्षा के समय लगातार शारीरिक एवं मानसिक टेंशन बने रहना 

 

The state of perpetual tension (both mental and physical) that occurs right before, and during exam week. It results in students exhibiting strange behaviours or actions.

 

 

 

 

 

एग्जाम स्ट्रेस  तीन तरह के होते हैं 

 

प्री एग्जाम स्ट्रेस 

इन एग्जाम स्ट्रेस 

पोस्ट एग्जाम स्ट्रेस 

 

प्री एग्जाम स्ट्रेस :

 

परीक्षा के पहले जो तनाव होता है उसे प्री एग्जाम स्ट्रेस कहते हैं। प्री एग्जाम स्ट्रेस सामान्य विद्यार्थियों में भी पाया जाता है और टॉपर्स में भी।  हर बच्चे में कभी न कभी कुछ न कुछ लक्षण दिखाते हैं पर जब लगातार ये दिखे और उसका असर पढाई पर पड़ने लगे तब किसी काउंसलर के पास अवश्य जायें।  

 

प्री एग्जाम स्ट्रेस के लक्षण (सामान्य विद्यार्थी के लिए )

१. घबराहट 

२. भूख का काम या ज्यादा लगना 

३. लम्बे समय तक पढाई के लिए बैठने में दिक्कत 

४. सोशल मीडिया में राहत ढूंढने का प्रयास 

५. बड़ी बड़ी बातें करना 

६. कुछ हट कर करने पर जोड़ देना 

७. 

 

टॉपर्स के लिए :

 

१. बेस्ट परफॉरमेंस न कर पाने का भय 

२. दुसरे उनसे अच्छा कर जाएंगे , और ज्यादा पढ़ा पा रहे हैं इसका भय 

३. नींद ज्यादा आने की चिंता 

४. रीविजन की स्ट्रेटेजी को लेकर आशंका 

५. एग्जाम पैटर्न एवं toughness लेवल को लेकर तनाव 

 

 

इन एग्जाम स्ट्रेस :  परीक्षा देने की अवधी में जो तनाव होता है उसी इन एग्जाम स्ट्रेस कहते है।  यह हर बच्चे में होता है, डिफरेंस डिग्री ऑफ़ डिस्टर्बेंस का होता है। 

 

कारण :

१. परीक्षा हॉल में दूसरों को देखकर महशूस करना अपनी तयारी दुसरे से कम है 

 

२. प्रश्न पत्र देखकर एकाएक विचार आना की मुझसे तो ये न बनेगा 

३. सवाल बनने के बावजूद यह विचार आना के जितनी तैयारी थे उतना शानदार परिणाम नहीं आएगा 

४. घबराहट से जाने हुए सवाल का न बनना 

 

समाधान :

१. अपनी तैयारी पर यकीन करना 

२. प्रश्न पत्र को ध्यान से पढ़ना 

३. परिणाम के प्रति चिंता को यथासंभव नियंत्रित करना 

४. परीक्षा के पूर्व अपने माता पिता को वस्तुस्थिति से अवगत कराना 

५. परीक्षा की आखिरी रात समय पर सोना 

 

पोस्ट एग्जाम स्ट्रेस : परीक्षा के बाद परिणाम के चिंता पोस्ट एग्जाम स्ट्रेस के श्रेणी में आता है 

 

कई बच्चे तीनो प्रकार के स्ट्रेस के शिकार हो जाते हैं , दो के और कुछ सिर्फ एक के भी होते हैं 

 

 

कारण :

१. परीक्षा का अच्छा न जाना 

२. माता-पिता -शिक्षक -मित्रों -समाज के उम्मीद पर खरा नहीं उतारने का भय 

३. भविष्य की चिंता 

४. आत्मसम्मान खोने का दर 

५. एक साल समय बर्बाद होने का भय 

 

 

समाधान :

 

१. तुरंत निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे 

२. अपने माता-पिता एवं प्रिय शिक्षक से तुरंत बात करें 

३. परीक्षा के बाद डिस्कसन से बचें 

४. काउंसलर का सहयोग लें 

 

 

 

बारवीं बोर्ड एवं इंजीनियरिंग -मेडिकल की परीक्षा देने वाले क्या करें 

 

१.  शत प्रतिशत ध्यान बोर्ड परीक्षा पर दें 

२. अगर दो विषयों के बीच गैप ज्यादा है और विषय नियंत्रण में है तब प्रतियोगी परीक्षा के लिए पढ़ें 

३. अभी विभिन्न करियर ऑप्शन का बहुत ख्याल आता है , यह सामान्य बात है ,इसे समझें और बोर्ड परीक्षा तक फोकस बनाये रखें 

५. एंट्रेंस एग्जाम के फॉर्म भरने के लास्ट डेट की प्रति सजग रहें और जरुरत के मुताबिक जरूर भरें 

 

अभिवावक क्या करें 

 

१. संवाद जारी रखे 

२. किसी भी बात को हलके में और अति गंभीरता से न ले , उचित परामर्श के लिए अपने मित्र या काउंसलर का सहयोग ले 

३. जिस विषय में बच्चे की तैयारी कम है या बच्चा चिंतित है उस दिन हर काम छोड़कर परीक्षा केंद्र में पहुचाने और लाने जायें 

 

४. अब अपना सुझाव देना बंद कर दें। 

५. एंट्रेंस एग्जाम के काउंसलिंग प्रोसेस की जानकारी स्वयं भी हासिल करें 

 

ग्यारहवीं के विद्यार्थी क्या करें 

 

१. आपकी परीक्षा हाफ इयरली से अच्छी जायेगी ये यकीन रखें 

२. कोई एक विषय हो सकता है काफी परेशान करे पर जो अच्छा है उस पर भी ध्यान देकर अच्छा नंबर सुनिश्चित करें

३. बारहवीं का सफर ग्यारहवीं से आसान होगा इसलिए चिंता मुक्त होकर पढाई करें 

४. माता -पिता की चिंता इस समय सबसे ज्यादा रहती है , यह स्वाभाविक है इसलिए बात बात पर अपना संयम नहीं खोयें 

५. इंग्लिश पर भी ध्यान दें  

 

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